अहमदाबाद न्यूज डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेटिकन के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो XIV के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ट्रंप द्वारा पोप के खिलाफ की गई तल्ख टिप्पणियों के बाद दुनिया भर के ईसाई समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। अहमदाबाद के प्रसिद्ध कैथोलिक पादरी सेड्रिक प्रकाश ने इस मामले पर ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए पोप के शांति प्रयासों का पुरजोर समर्थन किया है।
फादर सेड्रिक प्रकाश ने आईएएनएस (IANS) से बातचीत में कहा कि ट्रंप का बयान न केवल गलत है, बल्कि यह शांति और सद्भाव की वैश्विक कोशिशों पर हमला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोप का संदेश महज ईसाइयों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। पादरी ने उन तीन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया जिन पर पोप जोर दे रहे हैं:
जंग और हिंसा की निंदा: युद्ध को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता और हिंसा या घृणा किसी भी समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।
संवाद की अपील: दुनिया के शीर्ष नेताओं (चाहे वह अमेरिका, इजरायल या ईरान के हों) को एक मेज पर बैठकर बातचीत से विवाद सुलझाने चाहिए।
शांति की अनिवार्यता: दुनिया के अस्तित्व के लिए शांति और न्याय सबसे जरूरी है।
ट्रंप ने पोप लियो को कट्टर वामपंथियों के प्रभाव में बताया था और उन्हें अमेरिकी विदेश नीति के लिए "कमजोर" और "भयानक" करार दिया था। इसके जवाब में पादरी प्रकाश ने सवाल उठाया कि शांति और निडर होकर जीने की बात करना विदेश नीति को कमजोर कैसे बना सकता है? उन्होंने कहा कि यह दो अमेरिकियों के बीच की जंग नहीं है, बल्कि यह शांति और न्याय की बात करने वाले एक शक्तिशाली व्यक्तित्व (पोप) और हिंसा व घृणा का प्रसार करने वाले व्यक्ति (ट्रंप) के बीच का वैचारिक टकराव है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में दावा किया था कि उनके राष्ट्रपति होने के कारण ही अमेरिका में जन्मे लियो पोप बन सके हैं। उन्होंने पोप पर अपराध के प्रति नरम रुख अपनाने का भी आरोप लगाया था। हालांकि, मानवाधिकारों और धार्मिक सद्भाव के लिए काम करने वाले लोग इसे ट्रंप की आक्रामक और ध्रुवीकरण करने वाली राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं।